Payper24

मनोज बाजपेयी की पूरी जीवन कहानी | Manoj Bajpayee life story in hindi

मनोज बाजपेयी की पूरी जीवन कहानी | Manoj Bajpayee life story in hindi

मनोज बाजपेयी [नेट वर्थ ₹147 करोड़]

भारतीय अभिनेता

मनोज बाजपेयी एक भारतीय अभिनेता, बॉलीवुड, के एक जाने-माने अभिनेता हैं। जो हिंदी सिनेमा में एक प्रयोगकर्मी (एक्सपेरीमेंटल) अभिनेता के रूप में जाने जाते है, और मुख्य रूप से हिंदी सिनेमा में काम करते हैं और उसके साथ ही तेलुगु और तमिल भाषा की फिल्में भी कर चुके हैं।

पूरा नाम : मनोज बाजपेयी
वैवाहिक स्थिति : विवाहित
पत्नी का नाम : नेहा बाजपेयी (शबाना रज़ा)
बच्चे : ऐवा नायला
माता-पिता : ज्ञात नहीं, राधाकांत बाजपेयी
जन्म तिथि : 23 अप्रैल 1969
जन्म स्थान : नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण, बिहार (भारत)
ऊंचाई : 5‘8 इंच
स्कूल : हट स्कूल, ख्रीस्त राजा हाई स्कूल,
कॉलेज / विश्वविद्यालय : सत्यवती कॉलेज, रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
व्यवसाय : अभिनेता
मासिक आय : 1 करोड़ +
पुरस्कार : सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार – सत्या (1998), पिंजर (2003), भोंसले (2021)

मनोज बाजपेयी की जीवनी | Manoj Bajpai life story

मनोज बाजपेयी का जन्म 23 अप्रिल 1969 को बिहार के पश्चिमी चंपारण के छोटे से गांव बेलवा बहुअरी में हुआ था। मनोज के पिता एक किसान थे और उनकी माँ एक गृहिणी थीं। एक किसान के बेटे के रूप में, मनोज अपनी छुट्टियों के दौरान खेती किया करते थे। वह बचपन से ही अभिनेता बनना चाहते थे।

मनोज अपने पांच अन्य भाई-बहनों में दूसरे नंबर के बच्चे हैं, और उनका नाम अभिनेता मनोज कुमार के नाम पर रखा गया था। उनकी छोटी बहनों में से एक पूनम दुबे, फिल्म उद्योग में एक फैशन डिजाइनर हैं। मनोज के पिता को मनोज की शिक्षा के लिए धन इकट्ठा करने में कठिनाई होती थी। क्यूंकि बतौर किसान उनका घर का खर्च ही बहुत मुश्किल से चल पता था। 

वह सत्रह साल की उम्र में नई दिल्ली चले गए और बाजपेयी ने ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह जैसे अभिनेताओं से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के बारे में सुन रखा था, इसलिए मनोज ने भी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में आवेदन किया लेकिन उनकी तक़दीर कही जाये या समय का दुर्भाग्य, कि मनोज को तीनो बार खारिज कर दिया गया और यह सब देख मनोज ने आत्महत्या करने का मन बना लिया था।

इसके बाद उन्होंने अभिनेता रघुबीर यादव के सुझाव के बाद निर्देशक और अभिनय कोच बैरी जॉन की कार्यशाला (वर्कशॉप) में भाग लिया। बाजपेयी के अभिनय से प्रभावित होकर, बैरी जॉन ने उन्हें अपने शिक्षण संस्थान में सहायता करने के लिए काम पर रख लिया। उसके बाद उन्होंने फिर चौथी बार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के लिए आवेदन किया, और इस बार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय वालों ने उनको सीधा स्कूल में एक शिक्षण पद की पेशकश कर दी।

manoj bajpayee with her wife neha
Source : bollywoodshaddis.com

मनोज बाजपेयी की शादी पहले दिल्ली की एक लड़की से हुई थी, लेकिन मनोज के संघर्ष के दौर के दौरान उनका तलाक हो गया। फिर मनोज की अभिनेत्री शबाना रज़ा से मुलाकात हुई, जिन्हें नेहा के नाम से भी जाना जाता है, उनकी पहली फिल्म करीब (1998) के ठीक बाद 2006 में इस जोड़े ने शादी की और उनकी नेहा से एक बेटी है, जिसका नाम ऐवा नायला है।

मनोज बाजपाई की एक्टिंग स्टाइल के बारे में एक ग्रन्थ लिखा जाये तो भी कम है। क्यूंकि मनोज बाजपेयी एक विधि (मैंथड़) अभिनेता और एक निर्देशक यानि डायरेक्टर्स एक्टर हैं, जो फिल्मों में उनकी अपरंपरागत भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं। यहाँ तक की इस दौर के लीजेंडरी दिग्गज अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी तक ने अक्स में मनोज बाजपेयी द्वारा निभाई हुई भूमिका के प्रदर्शन को अपनी फिल्म किक (2014) में हूबहू करने की कोशिश की। 

मनोज बाजपेयी अमिताभ बच्चन, नसीरुद्दीन शाह और रघुबीर यादव को अपनी प्रेरणा बताते है। निर्देशक राम गोपाल वर्मा उन्हें अपने लिए “एक शिक्षा” मानते हैं और कहा कि वह “एक ऐसे अभिनेता हैं जिनके साथ मुझे भी काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।” 

बैंडिट क्वीन में उन्हें निर्देशित करने वाले शेखर कपूर मनोज को याद करते हुए बताते हैं कि “मनोज में बहुत कम करके बहुत कुछ चित्रित करने की क्षमता है। उन्होंने कभी भी एक दृश्य को ओवरप्ले करने की कोशिश नहीं की और हर सीन को मनोज एक न्यूनतम बयान के साथ पूरी सहजता के साथ पूरा कर देते है।” निर्देशक हंसल मेहता के अनुसार, मनोज “कुछ अन्य लोगों की तरह खुद को बदलने की क्षमता रखने वाले अभिनेता हैं।

मनोज बाजपेयी की पूरी जीवन कहानी | Manoj Bajpayee life story in hindi
Source : Google.com

सत्या में भीकू म्हात्रे के रूप में मनोज बाजपेयी के प्रदर्शन को हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार पात्रों में से एक माना जाता है, साथ ही इसमें उनके डायलाग के साथ: “मुंबई का राजा कौन? भीकू म्हात्रे” को हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे उम्दा डायलाग माना जाता है। मनोज बाजपेयी ने हिंदी सिनेमा में काम करने के अलावा तेलुगु और तमिल भाषा की कई फिल्में भी की हैं।

के के मेनन भीकू म्हात्रे के इस किरदार को अन्य तरीकों के अभिनेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में श्रेय देते हैं मेनन कहते है कि यदि यह किरदार सत्या में मनोज के शानदार प्रदर्शन के लिए नहीं होता, तो इरफान और मेरे जैसे अभिनेता अभी भी स्वीकार किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे होते। मनोज ने हमारे लिए दरवाजे खोल दिए। अपनी पुस्तक पॉपकॉर्न ऐसेइस्टस में जय अर्जुन सिंह ने लिखा है कि “पृथ्वी” और “प्रामाणिकता” बाजपेयी के प्रदर्शन में दृढ़ता का सूक्ष्म परिणाम है।

मनोज बाजपेयी शिक्षा | Manoj Bajpai education

मनोज बाजपेयी ने चौथी कक्षा तक हट स्कूल में अध्ययन किया, और फिर बाद में मनोज ने अपनी स्कूली शिक्षा ख्रिस्त राजा हाई स्कूल, बेतिया से की और फिर बेतिया के ही महारानी जानकी कुंवर कॉलेज से मनोज ने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

सत्रह वर्ष की आयु में मनोज नई दिल्ली चले गए और फिर दिल्ली के सत्यवती कॉलेज और उसके बाद रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी प्राप्त की।

मनोज बाजपेयी करियर | Manoj Bajpai career

मनोज ने अपने करियर में कम उतार चढ़ाव नहीं देखे क्यूंकि उस वक़्त तो क्या आज भी बॉलीवुड जैसी इंडस्ट्री में बहारी लोगों को बहुत मस्सकत करनी पड़ती है और मनोज भी उन्मे से ही एक थे। क्यूंकि उस वक़्त मनोज के पास न तो लुक्स थे और न ही पर्सनालिटी थी। अगर कुछ था तो सिर्फ एक्टिंग और टैलेंट।

manoj bajpayee in a serial shwabhimaan
Source : indiatoday.in (Manoj Bajpai at left in a doordarshan show SHWABHIMAAN)

मनोज बाजपेयी ने अपना कैरियर दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक स्वाभिमान के साथ शुरु किया। उस वक़्त उन्होंने कम फीस में सीरियल में काम करने के लिए हामी भर दी। उसके ठीक बाद मनोज ने दूरदर्शन पर प्रकाशित धारावाहिक कलाकार जिसके निर्देशक हंसल मेहता थे और उसके बाद एक और धारावाहिक इम्तिहान में भी उन्होंने काम किया था।

बैंडिट क्वीन की कास्टिंग के दौरान तिग्मांशु धूलिया ने ही मनोज को पहली बार शेखर कपूर से मिलवाया था। इस फ़िल्म मे मनोज ने डाकू मान सिंह का किरदार निभाया था।

1994 में आयी फ़िल्म द्रोहकाल और 1996 में आयी दस्तक फ़िल्म में मनोज ने छोटे किरदार निभाये। 1997 में मनोज ने महेश भट्ट निर्देशित तमन्ना फ़िल्म की। इसी साल राम गोपाल वर्मा निर्देशित और संजय दत्त अभिनीत फ़िल्म दौड़ मे भी मनोज दिखे।

1998 में राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म सत्या के बाद मनोज ने कभी वापस मुड़ कर नहीं देखा। इस फ़िल्म मे उनके द्वारा निभाये गये भीखू म्हात्रे के किरदार के लिये उन्हे कई पुरस्कार मिले जिसमे सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार और फ़िल्मफेयर का सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार (क्रिटिक्स) मुख्य हैं।इसकी ज्यादातर शूटिंग मुंबई की असली मलिन बस्तियों में हुई थी। इसे 1998 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में भी प्रदर्शित किया गया था।

फिल्मफेयर ने बाद में बॉलीवुड के “टॉप 80 आइकॉनिक परफॉर्मेंस” के 2010 के अंक में मनोज के प्रदर्शन को शामिल किया। बाजपेयी ने फिर वर्मा के साथ वर्ष 1999 में फिल्म कौन और शूल की। कौन फिल्म एक घर में केवल तीन पात्रों के साथ एक वोडुनिट था, जहां बाजपेयी ने एक कष्टप्रद बातूनी अजनबी की भूमिका निभाई थी।

manoj bajpai shool movie poster
Source : imdb.in

मनोज के लिए साल 2000 की शुरुआत कॉमेडी फिल्म दिल पे मत ले यार और क्राइम ड्रामा घाट से हुई , दोनों फ़िल्में तब्बू के साथ थी इसी फिल्म में पूर्व के एक डायलाग ने कुछ राजनीतिक दलों में विवाद खड़ा कर दिया। 

2001 में बाजपेयी की पहली रिलीज़ राकेश ओमप्रकाश मेहरा की सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म अक्स थी। राघवन घाटगे के उनके नकारात्मक चित्रण, एक अपराधी जो मर जाता है और मनु वर्मा (अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत) के शरीर में पुनर्जन्म लेता है, ने मनोज को एक नकारात्मक भूमिका नामांकन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया।

फिर से सन 2002 से लेकर 2009 तक मनोज बाजपेयी के दिन बहुत संघर्ष भरे रहे। हालांकि 2002 मनोज बाजपेयी की एकमात्र रिलीज़ थ्रिलर फिल्म रोड थी। उन्होंने फिल्म में प्रतिपक्षी की भूमिका निभाई, एक सहयात्री जो एक जोड़े से लिफ्ट लेने के बाद एक मनोरोगी हत्यारा बन जाता है। बाजपेयी को इस फिल्म के लिए एक नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए एक और फिल्मफेयर नामांकन मिला।

पिंजर 2003 एक पीरियड ड्रामा फिल्म, जो भारत के विभाजन के दौरान सेट किया गया था, मनोज की साल की पहली रिलीज़ थी। चंद्रप्रकाश द्विवेदी द्वारा निर्देशित यह फिल्म इसी नाम पिंजर के एक पंजाबी उपन्यास पर आधारित थी। फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म विशेष जूरी पुरस्कार मिला।

बाद में उन्होंने जे.पी. दत्ता की कलाकारों की टुकड़ी की युद्ध फिल्म एलओसी: कारगिल में ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को चित्रित किया। यह फिल्म कारगिल युद्ध पर आधारित थी, और बाजपेयी को इसके लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। लेकिन दोनों फिल्में व्यावसायिक रूप से असफल रहीं थी।

फिर 2004 में मनोज ने फ़िल्में तो बहुत की जैसे जागो और वीर जारा। वीर जारा को 55वें बर्लिन फिल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया था, और विश्व स्तर पर 940 मिलियन (यूएस $12 मिलियन) से अधिक की इस फिल्म ने कमाई भी की, जो वर्ष 2004 की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई। लेकिन इन सब के वाबजूद हर फिल्म में मनोज को वो अहमियत नहीं मिलती थी जिसके वो हक़दार थे। 

manoj bajpai in a movie veer zara
Source : charmboard.com

2005 में मनोज ने बेवफा, फरेब और एक अंग्रेजी भाषी फिल्म रिटर्न टू राजपुर की और 2006 में एक तेलुगू रोमांटिक फिल्म हैप्पी में भी काम किया। फिर 2007 में फिल्म 1971 की जो की इंडो-पाकिस्तान वॉर पर आधारित थी और ये साल मनोज के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं रहा। 

क्यूंकि उनकी एक के बाद एक फिल्मं बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होती जा रही थी। साल 2007 की फ़िल्में स्वामी, दश कहानियाँ, ज़ाहिर, और 2008 की फिल्म मनी है तो हनी है भी बॉक्स ऑफिस पर सुपरफ्लॉप रही। तेलुगु फिल्म वेदम की शूटिंग के दौरान मनोज का कंधा घायल हो गया, और लगभग दो साल तक वे पर्दे से दूर रहे।

2010 में, बाजपेयी ने प्रकाश झा के बड़े बजट वाले राजनीतिक थ्रिलर ‘राजनीति‘ में अभिनय किया। द टाइम्स ऑफ इंडिया के निखत काज़मी ने अपनी समीक्षा में उल्लेख किया है कि बाजपेयी “अपने दृश्यों में आंखें मूंद लेते हैं” और “अपने मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रदर्शन की यादें वापस लाते हैं।

भारतीय व्यापार पत्रकार राजनीती के ₹600 मिलियन (US$8.0 मिलियन) के निवेश की वसूली से अभी भी आशंकित थे। हालाँकि, यह फिल्म दुनिया भर में ₹1.43 बिलियन (US$19 मिलियन) से अधिक की कमाई के साथ एक बड़ी व्यावसायिक सफलता साबित हुई। मनोज बाजपेयी को इस फिल्म के लिए भी फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का नामांकन मिला।

फिर 2011 में मनोज बाजपेयी की आरक्षण फिल्म आयी और आते ही ये फिल्म जैसा की आज तक हर एक अच्छी फिल्मों के साथ होता आया है विवादों में घिर जाना, और इस फिल्म के साथ भी ठीक वैसा ही हुआ। इसके बाद मनोज टूट से गए थे क्यूंकि इतने साल की कड़ी मेहनत और संघर्ष के वाबजूद उनको वो स्टारडम नहीं मिल पा रहा था जिसके वो हक़दार थे।

gangs of wasseypur
Source : Google.com

2012 में, बाजपेयी अनुराग कश्यप की दो-भाग वाली अपराध फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में दिखाई दिए। पहले वाले में उनका किरदार सरदार खान नजर आया था। अपनी भूमिका की तैयारी के लिए बाजपेयी ने अपना सिर मुंडवा लिया और चार किलोग्राम वजन कम किया। इसका प्रीमियर 2012 के कान्स फिल्म फेस्टिवल, टोरंटो फिल्म फेस्टिवल और 2013 में सनडांस फिल्म फेस्टिवल में हुआ।

गैंग्स ऑफ वासेपुर भारत में सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए 22 जून को रिलीज हुई। अनुपमा चोपड़ा ने इसे सत्या में भीकू म्हात्रे के बाद से मनोज बाजपेयी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया। फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए, एक बार फिर बाजपेयी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।

इसके बाद मनोज ने फिर अपने पिछले ज़िन्दगी के हिस्से को फिर कभी नहीं याद किया और एक से बढ़कर एक सुपरहिट फ़िल्में देते रहे। जैसे अलीगढ, स्पेशल 26, शूटआउट एट वडाला, साथ उच्चके, नाम शबाना, बुधिआ सिंह – बोर्न टू रन, रुख, ऐय्यारी, सत्यमेब जयते, रे और न जाने कितनी ऐसी फ़िल्में जिनके लिए कई बड़े अवार्डों से नवाज़ा जा चूका है।

अभी हाल ही में सोनिलिव पर प्रशारित भोंसले ने उन्हें नेशनल अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर का खिताब दिलाया और मनोज की मेहनत ने ही उन्हें आज एक सुपरस्टार बना दिया। हाल ही में उन्होंने ओटीटी को भी नहीं छोड़ा, इनकी फैमिली मैन वेब सीरीज का जादू सिर्फ भारत पर ही नहीं पूरी दुनिया पर छा गया।

मनोज कहते है एक वक़्त था जब कम से कम रूपए में भी मैं काम करने के लिए राज़ी हो जाता था। अब फॅमिली मैन की सक्सेस के बाद से ही इसके दूसरे सीजन के लिए उन्होंने 10 करोड़ रूपए मेहनताना लिया था। फिल्म रे के लिए भी हाल ही में फिल्मफेयर ओटीटी अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर में मनोज बाजपेयी का नाम नामांकित किया गया है।

the family man
Source : Google.com

मनोज बाजपेयी सम्मान और पुरस्कार सूची | Manoj Bajpai Honors and Awards list

मनोज बाजपेयी को अब तक तीन नेशनल अवार्ड फिल्म सत्या (1998), पिंजर (2003), और हाल ही में फिल्म भोंसले (2021) के लिए नेशनल अवार्ड मिल चूका है और 2019 में उन्हें पदम् श्री से भी नवाज़ा जा चूका है। अन्य उल्लेखनीय पुरस्कार जो मनोज बाजपेयी को दिए गए हैं उनकी सूची ये रही आपके समक्ष 

मनोज बाजपेयी की पूरी जीवन कहानी | Manoj Bajpayee life story in hindi
Source : indiatoday.in
वर्ष अवार्ड फ़िल्में कैटेगरी रिजल्ट
1998 नेशनल फिल्म अवार्ड सत्या सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वोन
1998 नेशनल फिल्म अवार्ड सत्या सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फ़िल्मफ़ेयर क्रिटिक्स पुरस्कार वोन
1998 नेशनल फिल्म अवार्ड सत्या सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
1999 फिल्मफेयर अवार्ड शूल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फ़िल्मफ़ेयर क्रिटिक्स पुरस्कार वोन
1999 फिल्मफेयर अवार्ड शूल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
2001 फिल्मफेयर अवार्ड अक्स नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
2002 फिल्मफेयर अवार्ड रोड नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
2003 फिल्मफेयर अवार्ड एलओसी: कारगिल सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
2003 नेशनल फिल्म अवार्ड पिंजर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार – जूरी विशेष पुरस्कार वोन
2010 फिल्मफेयर अवार्ड राजनीति सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
2012 फिल्मफेयर अवार्ड गैंग्स ऑफ वासेपुर – भाग 1 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार नॉमिनेटेड
2016 फिल्मफेयर लघु फिल्म अवार्ड तांडव लघु फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार वोन
2016 फिल्मफेयर अवार्ड अलीगढ़ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फ़िल्मफ़ेयर क्रिटिक्स पुरस्कार वोन
2016 एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड अलीगढ़ अभिनेता द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए एशिया पैसिफिक स्क्रीन पुरस्कार वोन
2020 फिल्मफेयर ओटीटी अवार्ड द फैमिली मैन ड्रामा सीरीज़ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (क्रिटिक्स) वोन
2021 इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न अवार्ड द फैमिली मैन (सीजन 2) वेब सीरीज में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वोन
2021  आनरेरी फैलोशिप भोंसले सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वोन
2021 फिल्मफेयर ओटीटी अवार्ड रे फिल्मफेयर ओटीटी अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर नॉमिनेटेड

मनोज बाजपेयी के बारे में रोचक तथ्य | Interesting facts about Manoj Bajpai

10 ऐसे कुछ अज्ञात और रोचक तथ्य अमिताभ बच्चन के बारे में जो शायद आप नहीं जानते होंगे। आइए आपको कुछ ऐसे ही तथ्य बताते है : 

  1. मनोज बाजपेयी को एक बार नहीं बल्कि तीन बार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने रिजेक्ट कर दिया था। लेकिन,… लेकिन जब चौथी बार उन्होंने फिर अप्लाई किया तो इस बार स्कूल ने उन्हें सीधा टीचर ही रख लिया था।
  2. मनोज बाजपेयी केवल 17 वर्ष के थे, जब वह फिल्मों में करियर शुरू करने के लिए दिल्ली चले गए। स्कूल के दिनों में वह बहुत ही शर्मीले लड़के हुआ करते थे।
  3. अपने कॉलेज के समय में, मनोज को उनके पिता द्वारा भेजे गए 200 रुपये मिलते थे और वह उन्हें पूरे महीने बड़ी ही समझदारी से खर्च करते थे।
  4. फिल्मों में मनोज की हमेशा से दिलचस्पी रही है। जंजीर में अमिताभ बच्चन का धमाकेदार अभिनय देखते ही उन्होंने अभिनेता बनने का दृढ़ निश्चय कर लिया था।
  5. छुट्टियों के दौरान अपने स्कूल से वापस आने के बाद मनोज अपनी खेती में अपने पिता की मदद किया करते थे।
  6. फिल्म सत्या करने के बाद वो मनोज ही वो कलाकार है जिनकी वजह से के के मेनन और इरफ़ान खान जैसे बेहतरीन कलाकारों का बॉलीवुड में आने का रास्ता आसान हो गया।
  7. मनोज बाजपेयी ने अपना कैरियर दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक स्वाभिमान के साथ शुरु किया।
  8. बैंडिट क्वीन की कास्टिंग के दौरान तिग्मांशु धूलिया ने ही मनोज को पहली बार शेखर कपूर से मिलवाया था।
  9. मनोज की फ़िल्म पिंजर अमृता प्रीतम के मशहूर उपन्यास ‘पिंजर‘ पर आधारित है। जिसके लिये उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।
  10. मनोज ने बैरी जॉन के मार्गदर्शन में स्ट्रीट चिल्ड्रेन के साथ काफी काम किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | Frequently asked questions

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनोज बाजपेयी की कुल संपत्ति करीब 147 करोड़ रुपये की है। इसके अलावा वह कई विज्ञापनों से भी करोड़ों की कमाई करते हैं।

मनोज बाजपेयी को सोनि लिव पर प्रसारित फिल्म 'भोंसले' के लिए अवॉर्ड दिया गया है। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत, साउथ सुपरस्टार धनुष और बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी सहित कई कलाकारों को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है। कंगना रनौत को फिल्म मणिकर्णिका और पंगा के लिए अवॉर्ड मिला है। धनुष को 'असुरन' के लिए अवॉर्ड दिया गया है।

उन्‍हें राष्‍ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया जा चुका है। मनोज का जन्‍म बिहार के पश्चिम चंपारण स्थित बेलवा गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।

मनोज बाजपेयी का जन्म नरकटियागंज में हुआ था। 

मनोज बाजपेयी के पिता का नाम राधाकांत बाजपाई है। 

मनोज बाजपेयी की एक ही बेटी है जिसका नाम ऐवा नायला है।

मनोज बाजपेयी को अब तक तीन नेशनल अवार्ड फिल्म सत्या (1998), पिंजर (2003), और हाल ही में फिल्म भोंसले (2021) के लिए नेशनल अवार्ड मिल चूका है। 

हाल ही में एक एंटरटेनमेंट पोर्टल से बात करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा, ''अभी कोई ऑफिस अटेंड नहीं कर पा रहा हैं, स्थिति सामान्य होने पर हम काम शुरू करेंगे और हमें प्रोजेक्ट के लिए हरी झंडी मिल जाएगी। राज और डीके के पास सीरीज की कहानी है। इसकी पटकथा पर काम जल्द ही शुरू होगा। अगर सब कुछ ठीक रहा, साल 2022 में द फैमिली मैन का तीसरा सीजन बना लेंगे।"

मनोज बाजपेयी पत्नी नेहा औऱ बेटी के साथ मुंबई के अंधेरी में रहते हैं। साल 2007 में मनोज बाजपेयी ने यह घर खरीदा था। ओबरॉय टॉवर में बने इस घर की कीमत 8 करोड़ रुपए बताई जाती है।

मनोज बाजपाई का जन्म नरकटियागंज पश्चिमी चंपारण बिहार में हुआ था। मनोज बाजपेयी ने अपने फिल्म करियर की शुरुआत 1994 में आई शेखर कपूर निदेशक फिल्म बैंडिट क्वीन से की थी।

Lets motivate & inspire others

Leave a Comment